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रोहिणी आचार्य का बड़ा खुलासा: संजय यादव और रमीज़ कौन हैं, जिन पर लगाए राजनीति छोड़ने के आरोप

भारत की राजनीति में कई घटनाएँ चर्चा में रहती हैं, लेकिन RJD सुप्रीमो ललू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा राजनीति छोड़ने का अचानक ऐलान पूरे देश में सुर्ख़ियों में छा गया। और असली हलचल तब मची जब उन्होंने दो नामों को खुलकर ज़िम्मेदार ठहराया —

"Rohini Acharya और Lalu Prasad Yadav की साथ में ली गई राजनीतिक चर्चा वाली नवीनतम फोटो—बिहार राजनीति में उभरते विवादों को दर्शाती हुई।"
रोहिणी आचार्य का बड़ा खुलासा: संजय यादव और रमीज़ कौन हैं, जिन पर लगाए राजनीति छोड़ने के आरोप?

 

संजय यादव और रमीज़।

यह सवाल हर किसी के मन में है — ये दोनों कौन हैं और रोहिणी ने इन्हें क्यों जिम्मेदार बताया?

आइए पूरी कहानी गहराई से समझते हैं।

संजय यादव कौन हैं? – RJD की रणनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा

संजय यादव RJD के भीतर एक बेहद प्रभावशाली नाम माने जाते हैं। तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद सलाहकार, रणनीतिकार और “इनर सर्कल” के सदस्य। उन्होंने चुनावी कैंपेन से लेकर पार्टी की सोशल मीडिया दिशा तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभाली हैं। पार्टी के अंदर उनका प्रभाव इतना है कि अक्सर उन्हें तेजस्वी का “साया” कहा जाता है। इसीलिए जब रोहिणी आचार्य ने सीधे उनका नाम लिया, यह साफ हो गया कि मामला बेहद गंभीर और आंतरिक था।

रमीज़ कौन हैं? – परिवार से जुड़े और निजी स्तर पर प्रभावशाली

रमीज़, रोहिणी आचार्य के बेहद करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से परिवार से जुड़े रहे हैं। राजनीति में उनकी कोई औपचारिक भूमिका नहीं, लेकिन पारिवारिक प्रभाव और रिश्ते के कारण उनका नाम बेहद अहम हो जाता है। रोहिणी ने आरोप लगाया कि संजय यादव और रमीज़ दोनों ने उन्हें राजनीति छोड़ने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने न सिर्फ राजनीति छोड़ी बल्कि अपने परिवार से भावनात्मक दूरी का भी ऐलान कर दिया।

रोहिणी का आरोप – “मैं राजनीति छोड़ रही हूं… और इसका कारण वही लोग हैं”

रोहिणी की पोस्ट एक तरह से विस्फोटक थी। उन्होंने कहा कि वे परिवार से नाता तोड़ रही हैं और राजनीति छोड़ रही हैं क्योंकि कुछ लोगों ने उन पर ऐसा करने का दबाव डाला।

सबसे चौंकाने वाली बात —

उन्होंने यह नाम छिपाए भी नहीं। सीधे कहा संजय यादव और रमीज़ ने ऐसा करने के लिए कहा था।

RJD परिवार में आखिर क्या चल रहा है?

यह सवाल अब बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा रहस्य बन गया है। चुनावी हार, रणनीतिक असहमतियाँ, परिवार में शक्ति संतुलन — सब कुछ इस घटना में जुड़ा हुआ लगता है।

रोहिणी का यह कदम सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।

आगे क्या होगा?

रोहिणी की राजनीति में वापसी संभव है या नहीं, इसका जवाब समय देगा। लेकिन इतना तय है कि संजय यादव और रमीज़ के नाम सार्वजनिक रूप से आने से RJD की आंतरिक राजनीति अब पहले जैसी नहीं रहेगी।

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